शहर की इस दौड में दौड के करना क्या है?
अगर यही जीना हैं दोस्तों... तो फिर मरना क्या हैं?
पहली बारिश में ट्रेन लेट होने की फ़िकर हैं......
भूल गये भींगते हुए टहलना क्या हैं.......
सीरियल के सारे किरदारो के हाल हैं मालुम......
पर माँ का हाल पूछ्ने की फ़ुरसत कहाँ हैं!!!!!!
अब रेत पर नंगे पैर टहलते क्यों नहीं........
१०८ चैनल हैं पर दिल बहलते क्यों नहीं!!!!!!!
इंटरनेट पे सारी दुनिया से तो टच में हैं.......
लेकिन पडोस में कौन रहता हैं जानते तक नहीं!!!!
मोबाईल, लैंडलाईन सब की भरमार हैं.........
लेकिन ज़िगरी दोस्त तक पहुंचे ऐसे तार कहाँ हैं!!!!
कब डूबते हुए सूरज को देखा था याद हैं??????
कब जाना था वो शाम का गुजरना क्या हैं!!!!!!!
तो दोस्तो इस शहर की दौड में दौड के करना क्या हैं??????
अगर यही जीना हैं तो फिर मरना क्या हैं!!!!!!!!
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Life Poem
YAH JEEVAN BHI EK AJEEB KHEL DIKHLATA HAI
KABHI PHOOLON KE RAHON PAR CHALATA HAI
TO KABHI GLANI KE SARITA MEIN DUBATA HAI
YAHA JEEVAN BHI EK AJEEB KHEL DIKHLATA HAI
JEEVAN KE IS ASTHAYI DAUD MEIN
MANUSHYA,PARISHRAM KARO TUM JI TOD KE
ASAMBHAV KEHNA GHOR PAAP HAI
PRAGATI KE LIYE YAHA SHABD ABHISHAP HAI
RAH MEIN TUMHARI BAHUT BAADHAYEIN AAYENGI
JO SHAYAD TUMHARA KUCH BIGADNA CHAHENGI
SAMNA KARO TUM UNKA DAT KAR
DUSRON KE LIYE PRERNA BANO APNE LAKSHYA KI OR AAGE BADKAR
SADHBHAV AUR MITRATA JEEVAN KE MUL BHAV HAI
EKTA SE HI CHALTI HAI YAHA ASTHAYI NAAV
DOOBNE KE DAR SE ZARA MAT RUKO TUM
HE MANUSHYA CHALE CHALO TUM,CHALE CHALO TUM
KABHI PHOOLON KE RAHON PAR CHALATA HAI
TO KABHI GLANI KE SARITA MEIN DUBATA HAI
YAHA JEEVAN BHI EK AJEEB KHEL DIKHLATA HAI
JEEVAN KE IS ASTHAYI DAUD MEIN
MANUSHYA,PARISHRAM KARO TUM JI TOD KE
ASAMBHAV KEHNA GHOR PAAP HAI
PRAGATI KE LIYE YAHA SHABD ABHISHAP HAI
RAH MEIN TUMHARI BAHUT BAADHAYEIN AAYENGI
JO SHAYAD TUMHARA KUCH BIGADNA CHAHENGI
SAMNA KARO TUM UNKA DAT KAR
DUSRON KE LIYE PRERNA BANO APNE LAKSHYA KI OR AAGE BADKAR
SADHBHAV AUR MITRATA JEEVAN KE MUL BHAV HAI
EKTA SE HI CHALTI HAI YAHA ASTHAYI NAAV
DOOBNE KE DAR SE ZARA MAT RUKO TUM
HE MANUSHYA CHALE CHALO TUM,CHALE CHALO TUM
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Life Poem
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ज़िंदगी बस मौत का इंतज़ार है, और कुछ नहीं।
हर शख़्स हुस्न का बीमार है, और कुछ नहीं।।
तुमको सोचते-सोचते रात बूढ़ी हो गई,
आँखों को सुबह का इंतज़ार है, और कुछ नहीं।।
अब तो जंगलों में भी सुकूँ नहीं मिलता,
हर चीज़ पैसों में गिरफ़्तार है, और कुछ नहीं।।
यह न सोचो, कहाँ से आती हैं दिल्ली में इतनी कारें,
जिनकी हैं, उनकी एक दिन की पगार है, और कुछ नहीं।।
नेताओं की दुवा-सलामी से कभी खुश मत होना,
चुनाव-पूर्व के ये व्यवहार हैं, और कुछ नहीं।।
हमने अपनी जी ली, जितना खुद के हिस्से में था,
बाकी की साँसें दोस्तों की उधार हैं, और कुछ नहीं।।
तेरे न फ़ोन करने पर, जब भी हम शिकायत करें,
इसे गिला मत समझना, ये तो प्यार है, और कुछ नहीं।।
हर शख़्स हुस्न का बीमार है, और कुछ नहीं।।
तुमको सोचते-सोचते रात बूढ़ी हो गई,
आँखों को सुबह का इंतज़ार है, और कुछ नहीं।।
अब तो जंगलों में भी सुकूँ नहीं मिलता,
हर चीज़ पैसों में गिरफ़्तार है, और कुछ नहीं।।
यह न सोचो, कहाँ से आती हैं दिल्ली में इतनी कारें,
जिनकी हैं, उनकी एक दिन की पगार है, और कुछ नहीं।।
नेताओं की दुवा-सलामी से कभी खुश मत होना,
चुनाव-पूर्व के ये व्यवहार हैं, और कुछ नहीं।।
हमने अपनी जी ली, जितना खुद के हिस्से में था,
बाकी की साँसें दोस्तों की उधार हैं, और कुछ नहीं।।
तेरे न फ़ोन करने पर, जब भी हम शिकायत करें,
इसे गिला मत समझना, ये तो प्यार है, और कुछ नहीं।।
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इस छोटी सी जिन्दगी के,
गिले-शिकवे मिटाना चाहता हूँ,
सबको अपना कह सकूँ,
ऐसा ठिकाना चाहता हूँ,
टूटे तारों को जोड़ कर,
फिर आजमाना चाहता हूँ,
बिछुड़े जनों से स्नेह का,
मंदिर बनाना चाहता हूँ.
हर अन्धेरे घर मे फिर,
दीपक जलाना चाहता हूँ,
खुला आकाश मे हो घर मेरा,
नही आशियाना चाहता हूँ,
जो कुछ दिया खुदा ने,
दूना लौटाना चाहता हूँ,
जब तक रहे ये जिन्दगी,
खुशियाँ लुटाना चाहता हूँ!
गिले-शिकवे मिटाना चाहता हूँ,
सबको अपना कह सकूँ,
ऐसा ठिकाना चाहता हूँ,
टूटे तारों को जोड़ कर,
फिर आजमाना चाहता हूँ,
बिछुड़े जनों से स्नेह का,
मंदिर बनाना चाहता हूँ.
हर अन्धेरे घर मे फिर,
दीपक जलाना चाहता हूँ,
खुला आकाश मे हो घर मेरा,
नही आशियाना चाहता हूँ,
जो कुछ दिया खुदा ने,
दूना लौटाना चाहता हूँ,
जब तक रहे ये जिन्दगी,
खुशियाँ लुटाना चाहता हूँ!
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सभी शिकवे जमाने के दफ़न कर लेना सीने में,
जिंदगी का मज़ा क्या है अरे मर - मर के जीने में
सभी शिकवे ज़माने के दफ़न कर लेना सीने में
जिन्दगी एक तोहफा है खुदा कि लाख नियामत है,
जरा पूंछो पत्थरों से जिन्हें ये ही शिक़ायत है
मुझे क्यूँ रब ने ना दी जिन्दगी क्या थी खता मेरी,
ठोकरें क्यूँ लिखीं तकदीर में ये तो बता मेरी
ना सरदी है ना गरमी है ना पतझड़ है ना बरसातें,
ना बूंदों कि ही रिमझिम का मज़ा सावन महीने में
सभी शिकवे ..................
ज़िन्दगी है कलश अमृत इसे भरपूर पिए जा,
हवा का एक झोंका बन मज़ा इसका तू लिए जा
जिन्दगी रंग से भर ले तितलियों के संग उड़कर,
कदम आगे बढाता चल कभी मत देखना मुड़कर
कभी मत कैद होना तू किसी कि चालबाजी में,
किसी के हार कंगन में किसी मोती नगीने में
सभी शिकवे जमाने के दफ़न कर लेना सीने में,
जिंदगी का मज़ा क्या है अरे मर - मर के जीने में !
जिंदगी का मज़ा क्या है अरे मर - मर के जीने में
सभी शिकवे ज़माने के दफ़न कर लेना सीने में
जिन्दगी एक तोहफा है खुदा कि लाख नियामत है,
जरा पूंछो पत्थरों से जिन्हें ये ही शिक़ायत है
मुझे क्यूँ रब ने ना दी जिन्दगी क्या थी खता मेरी,
ठोकरें क्यूँ लिखीं तकदीर में ये तो बता मेरी
ना सरदी है ना गरमी है ना पतझड़ है ना बरसातें,
ना बूंदों कि ही रिमझिम का मज़ा सावन महीने में
सभी शिकवे ..................
ज़िन्दगी है कलश अमृत इसे भरपूर पिए जा,
हवा का एक झोंका बन मज़ा इसका तू लिए जा
जिन्दगी रंग से भर ले तितलियों के संग उड़कर,
कदम आगे बढाता चल कभी मत देखना मुड़कर
कभी मत कैद होना तू किसी कि चालबाजी में,
किसी के हार कंगन में किसी मोती नगीने में
सभी शिकवे जमाने के दफ़न कर लेना सीने में,
जिंदगी का मज़ा क्या है अरे मर - मर के जीने में !
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Zindagi hai choti , har pal mein khush raho...
Office me khush reho, ghar mein khush raho..
Aaj paneer nahi hai, dal mein hi khush raho, Aaj gym jane ka samay nahi, do kadam chal ke he khush raho..
Aaj Dosto ka sath nahi, TV dekh ke hi khush raho..
Ghar ja nahi sakte to phone kar ke hi khush raho...
Aaj koi naraaz hai, uske iss andaz mein bhi khush raho..
Jisse dekh nahi sakte uski awaz mein hi khush raho...
Jisse paa nahi sakte uske yaad mein he khush raho MBA karne ka socha tha, S/W mein he khush raho...
Laptop na mila to kya, Desktop mein hi khush raho..
bita hua kal ja chuka hai, usse meeti yaadein hai,unme he khush raho..
aane wale pal ka pata nahi..sapno mein he khush raho..
Haste haste ye pal bitaenge, aaj mein he khush raho Zindagi hai choti , har pal main khush raho.....
Office me khush reho, ghar mein khush raho..
Aaj paneer nahi hai, dal mein hi khush raho, Aaj gym jane ka samay nahi, do kadam chal ke he khush raho..
Aaj Dosto ka sath nahi, TV dekh ke hi khush raho..
Ghar ja nahi sakte to phone kar ke hi khush raho...
Aaj koi naraaz hai, uske iss andaz mein bhi khush raho..
Jisse dekh nahi sakte uski awaz mein hi khush raho...
Jisse paa nahi sakte uske yaad mein he khush raho MBA karne ka socha tha, S/W mein he khush raho...
Laptop na mila to kya, Desktop mein hi khush raho..
bita hua kal ja chuka hai, usse meeti yaadein hai,unme he khush raho..
aane wale pal ka pata nahi..sapno mein he khush raho..
Haste haste ye pal bitaenge, aaj mein he khush raho Zindagi hai choti , har pal main khush raho.....
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जिन्दगी का पानी
जब छू लिया जाता है
उठती हैं तरंगे
हर उभार में सच
और गर्त में
भरम लिए
मैं सोचता हूँ
उस जिन्दगी को
जो ठहरे पानी की है
कहां रहता है
उसका सच
और किधर बहता है
भरम उसका
जब छू लिया जाता है
उठती हैं तरंगे
हर उभार में सच
और गर्त में
भरम लिए
मैं सोचता हूँ
उस जिन्दगी को
जो ठहरे पानी की है
कहां रहता है
उसका सच
और किधर बहता है
भरम उसका
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आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो
बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो
क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना
और दिमाग को पुराने पल याद हो ना हो
आज एक बार फ़िर पुरानी बातो मे खो जाओ
आज एक बार फ़िर पुरानी यादो मे डूब जाओ
क्या पता कल ये बाते
और ये यादें हो ना हो
आज एक बार मन्दिर हो आओ
पुजा कर के प्रसाद भी चढाओ
क्या पता कल के कलयुग मे
भगवान पर लोगों की श्रद्धा हो ना हो
बारीश मे आज खुब भीगो
झुम झुम के बचपन की तरह नाचो
क्या पता बीते हुये बचपन की तरह
कल ये बारीश भी हो ना हो
आज हर काम खूब दिल लगा कर करो
उसे तय समय से पहले पुरा करो
क्या पता आज की तरह
कल बाजुओं मे ताकत हो ना हो
आज एक बार चैन की नीन्द सो जाओ
आज कोई अच्छा सा सपना भी देखो
क्या पता कल जिन्दगी मे चैन
और आखों मे कोई सपना हो ना हो
क्या पता
कल हो ना हो
बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो
क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना
और दिमाग को पुराने पल याद हो ना हो
आज एक बार फ़िर पुरानी बातो मे खो जाओ
आज एक बार फ़िर पुरानी यादो मे डूब जाओ
क्या पता कल ये बाते
और ये यादें हो ना हो
आज एक बार मन्दिर हो आओ
पुजा कर के प्रसाद भी चढाओ
क्या पता कल के कलयुग मे
भगवान पर लोगों की श्रद्धा हो ना हो
बारीश मे आज खुब भीगो
झुम झुम के बचपन की तरह नाचो
क्या पता बीते हुये बचपन की तरह
कल ये बारीश भी हो ना हो
आज हर काम खूब दिल लगा कर करो
उसे तय समय से पहले पुरा करो
क्या पता आज की तरह
कल बाजुओं मे ताकत हो ना हो
आज एक बार चैन की नीन्द सो जाओ
आज कोई अच्छा सा सपना भी देखो
क्या पता कल जिन्दगी मे चैन
और आखों मे कोई सपना हो ना हो
क्या पता
कल हो ना हो
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**सुबह से लेकर रात तक.. भागती रहती है ये जिंदगी ..
कभी इस खबर.. कभी उस खबर.. मै .. बेखबर सा होकर घूमता रहता हूँ..
बदबूदार लाशें... नालियों में सड़ती नवजात बेटियाँ... तो बेटो के जन्मोत्सव..
चौराहे पर एक कट चाय पीकर... मई फिर भी कविता लिख लेता हूँ...
** निर्मोही सा ... अब ये मन .. नहीं पसीजता किसी घटना से.....
मोहल्ले के कुत्ते की मौत पर.... मै कभी बहुत रोया था....
अब नर संहारो से भी कोई सरोकार नहीं ....
फिर भी देर रात घर लौटते वक़्त..मै मुंडेर पर ..चिडियों का पानी भर लेता हूँ...
***परिभाषा काल की मुझे नहीं मालुम.. जाने कब क्या हो...
कोई मिला तो हंस लिए...न मिला तो चल दिए...
पदचाप अपने ...निशब्द भी मिले... तो युही कुछ गुनगुना लिया...
मै कैमरा अपना पैक करके ..छोटे से कमरे का .. झाडू-पोंचा कर लेता हूँ...
षडयंत्र..राजनीती.. विरोध ..प्रदर्शन... जीवन के अब सामान्य पहलु से हो चले ...
गोपाल..बंटी...गोलू...आबिद की...याद बहुत आती है..खेतो की मिट्टी में गुजरा था बचपन..
अब धमाको में उड़े.. बच्चो का खून...
अपनी खबर देखते-देखते... मै अपने जूतों से चुपचाप साफ कर लेता !
कभी इस खबर.. कभी उस खबर.. मै .. बेखबर सा होकर घूमता रहता हूँ..
बदबूदार लाशें... नालियों में सड़ती नवजात बेटियाँ... तो बेटो के जन्मोत्सव..
चौराहे पर एक कट चाय पीकर... मई फिर भी कविता लिख लेता हूँ...
** निर्मोही सा ... अब ये मन .. नहीं पसीजता किसी घटना से.....
मोहल्ले के कुत्ते की मौत पर.... मै कभी बहुत रोया था....
अब नर संहारो से भी कोई सरोकार नहीं ....
फिर भी देर रात घर लौटते वक़्त..मै मुंडेर पर ..चिडियों का पानी भर लेता हूँ...
***परिभाषा काल की मुझे नहीं मालुम.. जाने कब क्या हो...
कोई मिला तो हंस लिए...न मिला तो चल दिए...
पदचाप अपने ...निशब्द भी मिले... तो युही कुछ गुनगुना लिया...
मै कैमरा अपना पैक करके ..छोटे से कमरे का .. झाडू-पोंचा कर लेता हूँ...
षडयंत्र..राजनीती.. विरोध ..प्रदर्शन... जीवन के अब सामान्य पहलु से हो चले ...
गोपाल..बंटी...गोलू...आबिद की...याद बहुत आती है..खेतो की मिट्टी में गुजरा था बचपन..
अब धमाको में उड़े.. बच्चो का खून...
अपनी खबर देखते-देखते... मै अपने जूतों से चुपचाप साफ कर लेता !
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¢½ मैं दो कदम चलता और एक पल को रुकता मगर...........
¢½ इस एक पल जिन्दगी मुझसे चार कदम आगे बढ जाती ।
¢½ मैं फिर दो कदम चलता और एक पल को रुकता और....
¢½ जिन्दगी फिर मुझसे चार कदम आगे बढ जाती ।
¢½ युँ ही जिन्दगी को जीतता देख मैं मुस्कुराता और....
¢½ जिन्दगी मेरी मुस्कुराहट पर हैंरान होती ।
¢½ ये सिलसिला यहीं चलता रहता.....
¢½ फिर एक दिन मुझे हंसता देख एक सितारे ने पुछा..........
¢½ " तुम हार कर भी मुस्कुराते हो ! क्या तुम्हें दुख नहीं होता हार का ? "
¢½¢½ तब मैंनें कहा............
¢½ मुझे पता हैं एक ऐसी सरहद आयेगी जहाँ से आगे
¢½ जिन्दगी चार कदम तो क्या एक कदम भी आगे ना बढ पायेगी,
¢½ तब जिन्दगी मेरा इन्तज़ार करेगी और मैं.....
¢½ तब भी युँ ही चलता रुकता अपनी रफ्तार से अपनी धुन मैं वहाँ पहुँगा....
¢½ एक पल रुक कर, जिन्दगी को देख कर मुस्कुराउगा..........
¢½ बीते सफर को एक नज़र देख अपने कदम फिर बढाँउगा।
¢½ ठीक उसी पल मैं जिन्दगी से जीत जाउगा.......
¢½ मैं अपनी हार पर भी मुस्कुराता था और अपनी जीत पर भी...
¢½ मगर जिन्दगी अपनी जीत पर भी ना मुस्कुरा पाई थी और अपनी हार पर
¢½ इस एक पल जिन्दगी मुझसे चार कदम आगे बढ जाती ।
¢½ मैं फिर दो कदम चलता और एक पल को रुकता और....
¢½ जिन्दगी फिर मुझसे चार कदम आगे बढ जाती ।
¢½ युँ ही जिन्दगी को जीतता देख मैं मुस्कुराता और....
¢½ जिन्दगी मेरी मुस्कुराहट पर हैंरान होती ।
¢½ ये सिलसिला यहीं चलता रहता.....
¢½ फिर एक दिन मुझे हंसता देख एक सितारे ने पुछा..........
¢½ " तुम हार कर भी मुस्कुराते हो ! क्या तुम्हें दुख नहीं होता हार का ? "
¢½¢½ तब मैंनें कहा............
¢½ मुझे पता हैं एक ऐसी सरहद आयेगी जहाँ से आगे
¢½ जिन्दगी चार कदम तो क्या एक कदम भी आगे ना बढ पायेगी,
¢½ तब जिन्दगी मेरा इन्तज़ार करेगी और मैं.....
¢½ तब भी युँ ही चलता रुकता अपनी रफ्तार से अपनी धुन मैं वहाँ पहुँगा....
¢½ एक पल रुक कर, जिन्दगी को देख कर मुस्कुराउगा..........
¢½ बीते सफर को एक नज़र देख अपने कदम फिर बढाँउगा।
¢½ ठीक उसी पल मैं जिन्दगी से जीत जाउगा.......
¢½ मैं अपनी हार पर भी मुस्कुराता था और अपनी जीत पर भी...
¢½ मगर जिन्दगी अपनी जीत पर भी ना मुस्कुरा पाई थी और अपनी हार पर
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अब घर से निकलना हो गया है मुश्किल,
जाने किस मोड़ पर खडी है मौत......
दस्तक सी देती रहती है हर वक्त दरवाजे पर,
पलकों के गिरने उठने की जुम्बिश भी सिहरा देती है....
धड़कने बजती है कानो में हथगोलों की तरह,
हलकी आहटें भी थर्राती है जिगर ......
लेकिन जिन्दगी है की रुकने का नाम ही नहीं लेती,
दहशतों के बाज़ार में करते है सांसो का सौदा....
टूटती है, पर बिखरती नहीं हर ठोकर पे संभलती है,
पर कब तक ??? कहाँ तक???????
क्यूंकि अब घर से निकलना हो गया मुश्किल
जाने कौन से मोड़ पे खडी है मौत........
डर से जकड़ी है हवा,दूर तक गूंजते है सन्नाटे...
खुदा के हाथ से छीन कर मौत का कारोबार,
खुद ही खुदा बन बैठे है लोग....
मुखोटों के तिल्लिस्म में असली नकली कौन पहचाने
अपने बेगानों की पहचान में ख़त्म हो रही है जिन्दगी ...
अब लोग दूजों की ख़ुशी में ही मुस्कुरा लेते है,
घर जले जो किसी का तो,दिवाली मना लेते है....
खून से दूजों के खेल लेते है होली,
उडा कर नया कफन किसी को वो ईद मना लेते है........
क्यूंकि घेर से निकलना हो गया है मुशकिल
जाने कौन से मोड़ पर कड़ी है मौत....
जाने किस मोड़ पर खडी है मौत......
दस्तक सी देती रहती है हर वक्त दरवाजे पर,
पलकों के गिरने उठने की जुम्बिश भी सिहरा देती है....
धड़कने बजती है कानो में हथगोलों की तरह,
हलकी आहटें भी थर्राती है जिगर ......
लेकिन जिन्दगी है की रुकने का नाम ही नहीं लेती,
दहशतों के बाज़ार में करते है सांसो का सौदा....
टूटती है, पर बिखरती नहीं हर ठोकर पे संभलती है,
पर कब तक ??? कहाँ तक???????
क्यूंकि अब घर से निकलना हो गया मुश्किल
जाने कौन से मोड़ पे खडी है मौत........
डर से जकड़ी है हवा,दूर तक गूंजते है सन्नाटे...
खुदा के हाथ से छीन कर मौत का कारोबार,
खुद ही खुदा बन बैठे है लोग....
मुखोटों के तिल्लिस्म में असली नकली कौन पहचाने
अपने बेगानों की पहचान में ख़त्म हो रही है जिन्दगी ...
अब लोग दूजों की ख़ुशी में ही मुस्कुरा लेते है,
घर जले जो किसी का तो,दिवाली मना लेते है....
खून से दूजों के खेल लेते है होली,
उडा कर नया कफन किसी को वो ईद मना लेते है........
क्यूंकि घेर से निकलना हो गया है मुशकिल
जाने कौन से मोड़ पर कड़ी है मौत....
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AHSAS
AAJ MUJHSE MARI TANHAI KEHNE LAGI
KI YE KAISA EHSAS HAI
CHALAK PADE ANKHO SE AASU
JAB KI HAR KHUSHI MERE PASS HAI
KABHI-KABHI MAN BECHAN HO JATA HAI
JAISE ANDAR SE KUCH NIKAL GAYA HO
KITNA BHI ROKU IS DARD KO
PAR LAGTA HAI AASU PIGHAL GAYA HO
KITNA DARD HAI MARI AWAZ ME
YE NAHI KOI JANTA
HAR BAAT CHAHE SACHI HO
PAR NAHI KOI MANTA
AAJ FIR SE US DARD NE MUJHEY PUKARA HAI
OR VO DARD PEHLE SE BHI JYADA DARDNAK HAI
YE VAHAM HAI YA KUCH OR
JO BHI HAI BAHUT KHATRNAK HAI.
AAJ MUJHSE MARI TANHAI KEHNE LAGI
KI YE KAISA EHSAS HAI
CHALAK PADE ANKHO SE AASU
JAB KI HAR KHUSHI MERE PASS HAI
KABHI-KABHI MAN BECHAN HO JATA HAI
JAISE ANDAR SE KUCH NIKAL GAYA HO
KITNA BHI ROKU IS DARD KO
PAR LAGTA HAI AASU PIGHAL GAYA HO
KITNA DARD HAI MARI AWAZ ME
YE NAHI KOI JANTA
HAR BAAT CHAHE SACHI HO
PAR NAHI KOI MANTA
AAJ FIR SE US DARD NE MUJHEY PUKARA HAI
OR VO DARD PEHLE SE BHI JYADA DARDNAK HAI
YE VAHAM HAI YA KUCH OR
JO BHI HAI BAHUT KHATRNAK HAI.
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